सदियों से लेकर आज तक मेरा जलवा चल रहा हैं.मैं कभी झुका नहीं,जहां भी लगा तन कर खड़ा रहता हूँ.
महल से लेकर झोपड़ी तक मेरा रुतबा हैं।मैं कोठी,हवेली,बंगला,विला,जाने कितने नामो से
पहचाना जाता हूँ,
मुझे घमंड हैं कियो कि,आगरा में ताज,दिल्ली का लालकिला,इंडिया गेट,और ब्रिटन का किंग्सबर्ग भी मैं हूँ,
मॆरी किमत अलग अलग हैं,सफेद हूँ तो संगमरमर,पिला हूँ तो जैसलमेरी,जोधपुरी हूँ
मैं ही चितौड़ हूँ,मैं ही महरान हूँ ,मैं ही लालकिला हूँ
मंदिर,मस्जिद,दरगाह,गरुद्वारे,में मूर्ति बनकर बैठा हूँ
रास्ते का पत्थर हूँ मैं ,शमशान का पत्थर हूँ मैं,
मेरे ही नाती पोते हैं सोना,चांदी,पीतल,कांसी,लोहा.
मैं ही हिमालिया,मैं ही अबु पर्वत हूँ,मैं ही रॉकीस एनडीएस हूँ
मैने इस दुनिया को बनते बिगड़ते देखा हैं,जलजला मैने देखा हैं
सदियों का ग़वाह मैं हूँ,सतियों का जौहर देखा
कटते सिर और परिवार देखे,पऱ कभी रोया नहीं
कभी कभी तो इतना देख कर दुखी होता हूँ
कि मुझे इतना कठोर कियो बनाया,
वर्षो से आजतक और आगे तक ……… जीवित रहऊंगा,
जिसके पास जितना मैं उतना उतना अमीर
इसलिए मैं पत्थर हूँ
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